गौशालाएं केवल करुणा नहीं बल्कि हमारा हमारा धार्मिक नैतिक और पवित्र सांस्कृतिक कर्तव्य भी है । यह केवल सामान्य सेवा नहीं है बल्कि उस दया और संवेदनशीलता को बचाने का एक पवित्र, अटूट और अमिट संकल्प भी है जिसके लिए हमारे पुरखों ने कई ऐतिहासिक बलिदान दिए हैं , आप यह क्यों भूल जाते हैं कि आप उस संस्कृति के उत्तराधिकारी हैं जहां भोजन करने से पूर्व पहली रोटी गाय के लिए निकाली जाती है, क्या आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज हम अपने पुरखों के बलिदान को भूल गए हैं? क्या हमने अपनी संस्कृति को विस्मृत कर दिया है ? क्या पश्चिमी सभ्यता हमारे दिमाग को दीमक की तरह खा गई है ।
हमारे धर्म शास्त्रों की वाणी उद्घोष कर रही है कि “गावो विश्वस्य मातर: अर्थात गौ माता संपूर्ण जगत की माता है “। “गौ रक्षा धर्मस्य मूलं “क्योंकि गाय की रक्षा के बिना हमारे धार्मिक ग्रंथो के पवित्र आदेशों की पालना नहीं हो पाएगी। गौ सेवा का महत्व हमें समझाने के लिए स्वयं सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु ने इस धरती पर कई अवतार लिए हैं । योगेश्वर भगवान कृष्ण के रूप में उनका जो अवतार हुआ उसमें उन्होंने बाल्यकाल से लेकर संपूर्ण जीवन ही गौ सेवा का संदेश दिया है । जब सृष्टि के पालनहार हमारे आराध्य श्री भगवान ने स्वयं गौ सेवा की है तो अज्ञानी साधारण मनुष्य भला कौन होते हैं इस पवित्र परंपरा को ठुकराने वाले ?
जहां गाय की रक्षा होती है, समृद्धि और वैभव प्रदान करने साक्षात महालक्ष्मी वही निवास करती है । क्योंकि माता महालक्ष्मी तो साक्षात नारायण के साथ बिराजमान होती हैं । गौ सेवा परमो धर्म: अर्थात गाय की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, गौ सेवा के बिना सनातन धर्म की कल्पना नहीं की जा सकती सनातन धर्म में गाय का एक विशिष्ट स्थान है । हमारे सभी पूजा, यज्ञ एवं धार्मिक विधि विधान की कल्पना गौ माता के बिना नहीं की जा सकती है । गौ माता के बिना यज्ञ सम्पन्न नहीं हो सकते । गौ माता के बिना तुम्हारी पापों से मुक्ति भी नहीं हो सकती है । गौ माता की उपेक्षा कर के तुम किसी देवता को प्रसन्न नहीं कर सकते।
मैं भारत के युवकों से आवाहन करना चाहता हूं कि आज जब सड़क पर घायल भूखी और उपेक्षित गौ माता कराह रही है तब तुम्हारा मौन रहना अक्षम्य पाप और अपराध है । गौशालाएं तभी सार्थक होगी जब वो केवल आश्रय नहीं बल्कि हिंदू जागरण, संगठन निर्माण और आत्मनिर्भरता के युवा आंदोलन का केंद्र बने । प्यारे भाइयों बहनों एवं सम्मानित बुजुर्गों यह करुणा का नहीं यह हमारी चेतना को जागृत करने का समय भी है । गौ रक्षा केवल भावुकता का विषय नहीं है यह हमारी सभ्यता की अमिट पहचान है, उस गौरव शाली सनातन सभ्यता की पहचान जो अनादि काल से चली आई है । मित्रों जिस समाज में गौ माता असुरक्षित है वहां मनुष्य सुरक्षित कैसे रह सकता है ? गौशालाएं इस धरती पर संवेदना और दया के सबसे बड़े केंद्र है ।
गौशाला वह स्थान है जहां समाज का चरित्र गढ़ा जाता है। जहां यह तय होता है कि हम संवेदनशील हैं या केवल दर्शक हैं ? जहां यह तय होता है कि हम सेवक हैं या केवल मूक दर्शक है? जब तक गौ सेवा की पूरी व्यवस्था या पूरा सिस्टम तैयार नहीं होता तब तक गौ सेवा कमजोर रहेगी क्योंकि जो केवल दान पर टिकी रहे वह व्यवस्था नहीं बल्कि अल्पकालिक व्यवस्था है जो तुम्हारी सुविधानुसार चलती है जबकि सेवा सुविधानुसार नहीं आवश्यकतानुसार होनी चाहिए।
अब समय है कि हर गौशाला स्वावलंबन का केंद्र बन जाए । गोबर से ऊर्जा और जैविक खाद, धूप अगरबत्ती, गोमूत्र से कीटनाशक , प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधियां, पंचगव्य उत्पाद, दूध से घी,दही पनीर, शुद्ध मिठाईयां, गौवंश बैल से कृषि और श्रम से सम्मान प्राप्त किया जाए । यह सभी योजनाएं न केवल गौशालाओं का आर्थिक संबल प्रदान करेगी बल्कि ग्रामीण रोजगार और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है ।
मित्रों मेरा आह्वान है कि केवल एक बार का दान नहीं, दान की आदत चाहिए । केवल भावना ही नहीं भावना को लागू करने के लिए व्यवस्थित योजनाएं चाहिए, केवल पूजा नहीं पूजा के दौरान ली गई प्रतिज्ञा को लागू करने के लिए मन की प्रतिबद्धता चाहिए । गौरक्षा केवल कानून बनाने से नहीं होगी, यह जन भावनाओं से उत्प्रेरित्र ऐसा मजबूत लोक आंदोलन है जो हमारी आस्था का विषय है। कानून तब तक निष्प्रभावी है जब तक समाज सजग़ नहीं होगा, हर गांव हर नगर हर मोहल्ले में गौरक्षा समितियां बननी चाहिए ।
हर सनातनी युवा से पूछा जाना चाहिए कि तुम गौ माता के लिए क्या कर रहे हो ? प्यारे भाइयों और बहनों आप युवा शक्ति हैं आपने केवल नारे लगाने के लिए जन्म नहीं लिया है , आपका जन्म सृजन और निर्माण के लिए हुआ है प्रकृति आपके मजबूत कंधों पर परिवार के साथ साथ समाज धर्म और राष्ट्र की जिम्मेदारी प्रदान करने की अपेक्षा रखती है ।
गौशालाओं को युवाओं के लिए संवेदनशीलता एवं सेवा का प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाना चाहिए जहां युवा सेवा, स्वदेशी कृषि और उद्यम सीखें यही पुण्य भूमि भारत की असली राष्ट्र सेवा होगी ।
मिलावटी एवं दूषित पदार्थों का सेवन करके आज की युवा पीढ़ी की कमर टूट चुकी है । कमजोर शरीर और मन से हम धर्म रक्षा कैसे करेंगे ? आज की युवा पीढ़ी को गौ सेवा करके उत्तम दूध, घी एवं दूध से बने शुद्ध पदार्थ का सेवन करना चाहिए तथा अपना जीवन गौ माता की सेवा में समर्पित करना चाहिए और अपने स्वास्थ्य की रक्षा भी करनी चाहिए और गौ माता की सेवा करते हुए देश की सेवा भी करनी चाहिए । याद रखो गौशालाएं केवल गौशालाएं नहीं है। वह राष्ट्र की संवेदनशीलता की प्रयोगशालाएं हैं , जहां करुणा उत्पादक बनती है, जहां सेवा एक दिन रोजगार में बदल जाती है जहां धर्म अर्थ नीति में भी महत्वपूर्ण सकारात्मक भूमिका निभाता है, वहीं आदर्श गौशाला साकार होती है ।
मेरा देश के युवाओं से आवाहन है कि व्यर्थ बैठने का समय नहीं है उठो जागो और गंगा का पवित्र जल अपनी हथेली में धारण करके सेवा का पवित्र संकल्प लो । गौरक्षा को आन्दोलन और गौसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लो ।
गौ रक्षा को राष्ट्र की रक्षा भी समझो क्योंकि गौ माता बचेगी तभी हमारी सनातन संस्कृति बचेगी और यदि सनातन संस्कृति बचेगी तभी हमारा राष्ट्र सुरक्षित रहेगा । यह केवल लेख नहीं है, बल्कि यह आवाहन है सभी पाठकों से । यह केवल कोरा विचार नहीं है यथार्थ की भावुक योजना है । आज आवश्यकता है की गौसेवा मौन करुणा से निकलकर लोगों के हृदय में स्थित चेतना का विशाल आंदोलन बन जाए , क्योंकि जब तक सनातन समाज जागेगा नहीं तब तक गौ रक्षा केवल कम संख्या में सेवाभावी हाथों तक ही सिमट के रह जाएगी, जिससे संपूर्ण रूप से बड़े स्तर पर गौ सेवा नहीं हो पाएगी,अब प्रश्न केवल सेवा का नहीं है प्रश्न संकल्प का भी है । क्या हम गाय को केवल एक प्रतीक के रूप में पूजा करके संतुष्ट रहेंगे या उसे जीवंत अर्थव्यवस्था और संस्कृति का केंद्र बनाएंगे । गौरक्षा केवल भावुकता का प्रश्न नहीं है, यह हमारी सनातन सभ्यता की रक्षा का प्रश्न है | क्या आप जानते हैं कि जब गौ माता असुरक्षित होती है तब केवल एक प्राणी असुरक्षित नहीं होता बल्कि हमारी संपूर्ण दया, संवेदनशीलता, प्रकृति, अर्थव्यवस्था, सम्मान और हमारी धार्मिक आस्था भी असुरक्षित हो जाती है हमारी संस्कृति और गौरवशाली भविष्य भी संकट में पड़ जाता है । गौशालाएं वह स्थान बनने चाहिए जहां सेवा के साथ-साथ अच्छे विचार भी पैदा हो यह तभी संभव होगा जब दान के साथ-साथ दायित्व का भी बोध होगा । हमें केवल दान नहीं आपकी सहभागिता चाहिए । आपका भावनात्मक समर्थन चाहिए ।
गौ रक्षा का आंदोलन किसी की भीख पर खड़ा हुआ आंदोलन नहीं है यह आपकी भागीदारी पर खड़ा हुआ आंदोलन है जहां हर परिवार, हर युवा, हर संस्था जो गौ सेवा और गौ रक्षा कर रही है वो हमारे अपने लोग हैं वो हमारे सनातन परिवार के सदस्य है इसलिए गौ माता की सेवा किसी एक की नहीं हमारी सब की सामूहिक जिम्मेदारी है । कानून से पहले चेतना जागृत होनी बहुत जरूरी है कोई भी कानून तभी प्रभावी होगा जब समाज जागृत हो जाएगा, यदि चेतना नहीं होगी तो कानून केवल कागज बन के रह जाएगा । इसलिए गौशालाएं केवल संरक्षण का केंद्र नहीं हमारी सांस्कृतिक चेतना का केंद्र भी बनना चाहिए जब तक गौ रक्षा, गौ सेवा के आंदोलन से युवा नहीं जुड़ेंगे तब तक कोई भी आंदोलन दीर्घकालीन रूप से सफल नहीं हो पाएगा यह तय है।
आज का युवा रोजगार खोज रहा है वह अपने जीवन का उद्देश्य चाहता है , वह चाहता है कि उसे ऐसी जिंदगी चाहिए जो गौरवशाली हो । गौशालाएं हर युवा को यह तीनों दे सकती है उसे सेवा, स्वावलंबन और संस्कार प्रदान कर सकती है । भाइयों और बहनों गौ रक्षा एवं गौ सेवा का आंदोलन किसी वर्ग या समुदाय के विरुद्ध नहीं है बल्कि यह जीव दया ,प्रकृति और भारतीय संस्कृति के पक्ष में है, यह आंदोलन करुणा और दया को बचाने का है, यह आंदोलन युवाओं के आत्मनिर्भरता का हैं, यह आंदोलन भारत की आत्मा को पुनः जागृत करके उसे खोने से बचाने का है । अब समय आ गया है की गौशालाएं केवल पशुघर न बनकर रह जाए । समाज उदासीन न बने, हमारे हिंदू युवा पीछे ना हटे, गौरक्षा को सेवा से आगे ले जाने का संकल्प बनाया जाए क्योंकि जब गाय बचेगी तभी हमारी भारतीय संस्कृति बचेगी और जब संस्कृति बचेगी तभी यह राष्ट्र सशक्त बनेगा एवं पुनः विश्व गुरु की भूमिका में आएगा ।
यदि आप चाहते हैं कि संसार में करुणा एवं दया की समाप्ति नहीं होनी चाहिए तो गौशालाओं को बचाना होगा वरना इतिहास आपको मौन रहने का दोषी ठहराएगा, केवल आपकी चुप्पी और सहानुभूति से कार्य पूर्ण नहीं होगा आपको आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी । गौ माता को उपेक्षा से बाहर निकाल कर सेवा का केंद्र बिंदु बनाना होग।
हे भारत के नवयुवकों यह केवल एक हिंदू की पुकार नहीं तुम्हारे अंतरात्मा से किया गया एक आह्वान भी होना चाहिए कि जिस पवित्र पुण्य भूमि भारत में आपने अन्न जल ग्रहण किया है। जिस श्रेष्ठ संस्कृति ने तुम्हें पहचान दी, आज इस संस्कृति की जननी गौ माता उपेक्षा, पीड़ा और सहायता की आस में खड़ी है, धिक्कार है तुम्हारी जवानी को, जाकर चुल्लू भर पानी में डूब मरो । और अधिक क्या कहूं गौ सेवा केवल कोई परंपरा भर नहीं है, यह करुणा का केवल अभ्यास भी नहीं है,बल्कि यह संस्कारों की पुनः स्थापना है । यह राष्ट्र के प्रति हमारे उत्तरदायित्व का बोध है, तुम्हारी शक्ति केवल तुम्हारे शरीर में नहीं है मेरे भाइयों, तुम्हारी शक्ति तुम्हारी संवेदनाओं में भी है । जिस दिन तुम करुणामय बन जाओगे उस दिन कोई भी विदेशी संस्कृति तुम्हें पराजित नहीं कर पाएगी ।
भारत की गौशालाओं को केवल तुम्हारे सेवाभावी हाथ नहीं, तुम्हारा संवेदनशील सेवा के लिए आतुर हृदय भी चाहिए । इतिहास बनाने के लिए आओ और भीड़ का हिस्सा मत बनो क्योंकि भीड़ केवल तमाशा देखती है ,भीड़ में विवेक नहीं होता । गौ माता के प्रति सेवा का भाव जगाओ, तुम्हारे अंदर उठती हुई संवेदना को सामूहिक चेतना बना कर समाज का नेतृत्व करो | गौ सेवा केवल फोटो खींचने के लिए या वीडियो बनाने के लिए मत करो, ये केवल इस पवित्र परंपरा के साथ धोखा है यह न्याय नहीं है, लेकिन कोई और तुम्हारे फोटो वीडियो देख कर गौ सेवा की प्रेरणा ले ले तो फोटो खींचने में, प्रचार प्रसार करने में भी कोई समस्या नहीं है। गौसेवा को अपने जीवन की साधना बना लो क्योंकि कि जिस समाज में युवा करुणामय होता है वहां बड़ी से बड़ी क्रुरता टिक नहीं पाती ।
सेवा के लिए उठे हुए हाथ क्रूर कसाइयों के हाथों से ज्यादा शक्तिशाली और प्रतिष्ठित होते हैं । अंत में आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि आप गौ सेवा के लिए खड़े हो जाइए । कल इतिहास आपके साथ खड़ा होगा । गौ सेवा करने में किसी भी प्रकार का अहंकार आड़े नहीं आना चाहिए । गौ सेवा सभी प्रकार के अहंकार का नाश करती है । गौ सेवा से सभी प्रकार की बीमारियां दूर होती है । गौ माता में सभी कष्टों का हरण करने की क्षमता है । क्योंकि करुणा ही सच्ची शक्ति है और सच्ची सेवा में ही ईश्वर निवास करता है।
यदि तुम गौ रक्षा नहीं कर पाओगे तो यह संभव नहीं है कि तुम भारतीय संस्कृति की रक्षा कर पाओ और अपने परिवार और समाज की भी रक्षा कर पाओ । मेरे प्यारे भाइयों और बहिनों भारतीय संस्कृति तुम्हारी मजबूत भुजाओं की तरफ देख रही है ,उठो जागो और एक प्रण ले लो गौसेवा का, गौ माता की रक्षा का । भारत माता की जय । सनातन संस्कृति की जय । गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करो । जय श्री राम, जय गोपाल ।